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सिंघिया में किसान-मजदूरों का जोरदार प्रदर्शन

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किसान और मजदूर संगठन: भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द करें, चार श्रमकोड वापस लें, MANREGA पुनर्बहाल करें, बिजली एवं बीज विधेयक 2025 रद्द करें, सभी फसलों पर MSP लागू हो

सिंघिया/समस्तीपुर,देशभर में आयोजित राष्ट्रीय आम हड़ताल के अवसर पर सिंघिया में संयुक्त श्रम-किसान-मजदूर संगठनों ने भव्य जुलूस निकालकर प्रखंड मुख्यालय के सुभाष चौक पर जोरदार प्रदर्शन और सभा का आयोजन किया। हड़ताल की मुख्य मांगों में भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द करना, चार मजदूर विरोधी श्रमकोड वापस लेना, MANREGA में बदलाव को रद्द करना, बिजली एवं बीज विधेयक 2025 वापस लेना, किसानों के सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और एफआर में वंशावली लागू करना शामिल था।
गुरुवार को सुबह 10 बजे भाकपा माले, भाकपा और एसयूसीआई से जुड़े कार्यकर्ता सुभाष चौक पर एकत्रित हुए। झंडे, बैनर और तख्तियों से सजा जुलूस बाजार क्षेत्र की गलियों से होते हुए प्रखंड मुख्यालय की ओर बढ़ा। कार्यकर्ताओं ने नारे लगाते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों का विरोध किया। विशेष रूप से “भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द करो!”, “चार श्रमकोड वापस लो!”, “MANREGA बहाल करो!”, “सभी फसलों पर MSP लागू करो!” जैसे नारे जोर-जोर से सुनाई दिए।
जुलूस के दौरान स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों ने भी हड़ताल के महत्व को समझते हुए इसे समर्थन दिया। कई लोगों ने जुलूस में हाथ मिलाकर शामिल होने की इच्छा जताई। जुलूस बाजार क्षेत्र का भ्रमण कर प्रखंड मुख्यालय के सुभाष चौक पर पहुंचा और वहां सड़क किनारे धरना प्रदर्शन में तब्दील हो गया। कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण ढंग से बैठकर अपनी मांगों की गूंज सुनाई और सरकार के नीति विरोधी कदमों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया।
सभा की अध्यक्षता भाकपा माले प्रखंड सचिव रामचंद्र प्रधान, CPM के संजिव कुमार शंभु, CPI से अशोक, पूर्व कांग्रेस से डॉक्टर समोली झा और राजद से रामनंदन पासवान ने संयुक्त रूप से की। सभा का संचालन रामचंद्र प्रधान ने किया।
सभा में भाकपा माले नेता अरुण सिंह, प्रोफेसर रोशन कुमार सिंह, ओम प्रकाश यादव, ललटन राम, कपिलेश्वर पासवान, बलेश्वर यादव, दिनेश सदा, मुकेश कुमार सिंह सहित दर्जनों नेताओं ने केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी बात रखी। उन्होंने किसानों और मजदूरों के हितों पर केंद्रित मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया।
सिंघिया वासियों के लिए यह हड़ताल एक ऐतिहासिक अवसर साबित हुई। नेताओं ने कहा कि MSP पर सभी फसलों को शामिल करना, MANREGA बहाल करना, बिजली और बीज विधेयक 2025 को वापस लेना और चार श्रमकोड रद्द करना हड़ताल की मुख्य मांगों में शामिल है। इसके अलावा ओपीएस बहाली, निजीकरण पर रोक, श्रमिक योजनाओं में धांधली बंद करना, दैनिक मजदूरी बढ़ाकर 700 रुपये करना और तिरहुत नहर परियोजना में अधिग्रहित जमीन एवं मकानों का वर्तमान सर्किल रेट का चार गुणा मुआवजा देने की भी मांग की गई।
भाकपा, भाकपा माले, एसयूसीआई और अन्य किसान-मजदूर संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जोर देकर कहा कि सरकार की नीति के खिलाफ जनता में गहरा आक्रोश है। इस हड़ताल ने मजदूर-किसान एकता को मजबूती प्रदान की और सरकार के खिलाफ जनभावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त किया।
सभा में स्थानीय जनता, किसानों, युवा कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं ने भी हिस्सा लिया। आयोजकों ने कहा कि इस तरह की हड़तालें किसानों-मजदूरों और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं और यह संदेश देती हैं कि सरकार को अपनी नीतियों पर फिर से विचार करना होगा।
सिंघिया प्रखंड मुख्यालय पर आयोजित इस विशाल प्रदर्शन और सभा ने यह स्पष्ट कर दिया कि केंद्र एवं राज्य सरकार की किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जनता का विरोध लगातार बढ़ रहा है।

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